Zindgi ki raho me aise chal pada hu,
Na aage dekh paa raha hu , Nahi zindgi ji paa raha hu,
Is qadar kho diya hey khud ko,
Me khudko dekh hi nahi paa raha hu.
Zindgi ki raho me aise chal pada hu,
Na aage dekh paa raha hu , Nahi zindgi ji paa raha hu,
Is qadar kho diya hey khud ko,
Me khudko dekh hi nahi paa raha hu.
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
वीराँ है मैकदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास है
तुम क्या गये के रूठ गये दिन बहार के
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हमने हौसले परवर-दिगार के
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
भूले से मुस्कुरा तो दिये थे वो आज ‘फ़ैज़’
मत पूछ वलवले दिलए-ना-कर्दाकार के
तुम पूछते थे न किअगर यूँ होता तो क्या होतासुन ले- ऐ ग़ालिब,आज तू होता तो बहुत रोताबड़े महलों के सामनेइंसानी वजूद भी पड़ गया छोटाजहाँ वो अमीर प्लेट फेकतावहीं मैं गरीब भूखा सोता