
jado chdaayia hon
ohdo rab ni vikhdaa
ahankar to bach ke rahi put
kyunki banda baaz hi kyu na hove
mar ke ta dharti te hi digdaa

चाल अभी धीमी है,
पर कदम जाएंगे मंजिल तक जरूर।
हालात अभी उलझे हैं,
पर बदलेंगे मौसम,बिखरेगा हरसू नूर।
हौसलों की कमी नहीं,
क़्त भले ना हो ज्यादा।
शह मात की खेल है जिंदगी,
मंजिल को पाने की, हम रखते हैं माआदा।
पलकें मूंद जाती हैं झंझावतों से,
रास्ते छुप जाते हैं काले बदली की छाँव में।
गुजरना ही होगा अंधियारे सूने गलियारों से,
आशियाना हो चाहे गांव या शहर में।
लक्ष्य जो बुन लिया है विश्वास के तागों से,
अब रुकना नहीं, न झुकना कहीं तुम सफर में ।
डगर ने चुन लिया है तुम्हें साहस के पदचिन्हों से,
धैर्य,सहनशीलता और जीत, होंगे सहचर तुम्हारे सहर में।।
तरुण चौधरी
kabhee jindagee mein kisee ke liye mat rona,
kyonki vo tumhaare aansuon ke qaabil na hoga,
aur jo in aansuon ke qaabil hoga,
vah tumhen rone hee nahin dega..
कभी जिंदगी में किसी के लिये मत रोना,
क्योंकि वो तुम्हारे आँसुओं के क़ाबिल ना होगा,
और जो इन आँसुओं के क़ाबिल होगा, वह तुम्हें रोने ही नहीं देगा..