
jado chdaayia hon
ohdo rab ni vikhdaa
ahankar to bach ke rahi put
kyunki banda baaz hi kyu na hove
mar ke ta dharti te hi digdaa

किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी
Bure waqt to badal jaata hai
lekin bura waqt aur bure waqt me badle huye insaan yaad reh jaate hai
बुरे वक्त तो बदल जाता हैं,
लेकिन बुरा वक्त और बुरे वक्त मे बदले हुए इंसान याद रह जाते हैं।