Enjoy Every Movement of life!
हदें शहर से निकली तो गांव गांव चली
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली
सफर में धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ
वो जिंदगी ही क्या जो छांव-छांव चली
Zindagi Se badi Koi saza hi nahi ….
Mera jurm kya hai mujhe pata hi nahi …
Mai itne hisson me bant chuka hu …
Ke mere Hisse me Kuch bacha hi nahi …
जिंदगी से बड़ी कोई सजा ही नही …
मेरा जुर्म क्या है मुझे पता ही नही …
मैं इतने हिस्सों में बंट चुका हूं ….
के मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं ….
