
Nazar wahi tak yaha tak tum ho,
Vese to hazaron phool khilte hain gulshan mein magar,
Khushboo vahi takk yaha tak tum ho 💕

saade lai na koi changa te naa koi maadha
kyuki chehre taa kise de v ajh kal ik ni haige
ਸਾਡੇ ਲਈ ਨਾ ਕੋਈ ਚੰਗਾ ਤੇ ਨਾ ਕੋਈ ਮਾੜਾ
ਕਿਉਂਕਿ ਚੇਹਰੇ ਤਾ ਕਿਸੇ ਦੇ ਵੀ ਆਜ ਕਲ ਇੱਕ ਨੀ ਹੇਗੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…