tere husn ko parde kee zarurat hee kya hai,
kaun hosh mein rahata hai tujhe dekhane ke baad…
तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद… 💖💖
tere husn ko parde kee zarurat hee kya hai,
kaun hosh mein rahata hai tujhe dekhane ke baad…
तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद… 💖💖
Kaho toh khwaab mukammal kardu,
tere naam apna har ek pal kardu.❤️
Mujhme duub kar tum kabhi nikal hi na pao,
kaho toh apne aap ko dal dal kardu… ☺️
कहो तो एक ख्वाब मुक्कमल कर दूं,
तेरे नाम अपना हर एक पल कर दूं,❤️
मुझमे डूब कर तुम कभी निकल ही न पाओ,
कहो तो अपने आप को दलदल कर दूं।☺️
स्त्री हूं मैं मेरा कहां सम्मान होता है
मेरे कपड़ों से मेरा चरित्र भाप लिया जाता है।
अगर जींस या वेस्टर्न ड्रेस पहन लूं मैं
तो मैं बिगड़ी हुई मान ली जाती हूं।
अगर मैं साड़ी भी पहनूं तो भी
उसमे भी खोट नजर आती है।
मेरी साड़ी में भी कमिया ही नजर आती है।
यहां तो एक औरत भी औरत का सम्मान नही करती
एक औरत को दूसरी औरत में भी खोट नजर आती है।
मेरे कपड़ों में कोई कमी नहीं कमी तुम्हारी नज़र में है
मैं कुछ भी पहन लूं तुम्हे कमी नजर आनी ही है।