Enjoy Every Movement of life!
है गुस्ताखी बेवफाई
है गुस्ताखी बेवफाई,
उसने ये गुस्ताखी कर दिखाई।
जो जान थी कभी हमारी..
जो जान थी कभी हमारी,
आज हो गई है पराई।।
उसकी एक मुस्कुराहट, मेरे दिल की कई हसरतों को जिंदा करती है..
उसके रूप की स्याही मानो, कई रंग मेरे दिल में भरती है..
नजाकत से भरी नजरें जैसे, कह रही हों के मुझपे मरती हैं..
जवाब में मेरी नजरें भी उसे, हाँ में इशारा करती हैं..
कहते-कहते कई बातों को, जुबान कई बार ठहरती है..
मन ही मन काफ़ी कुछ कहकर, कुछ भी कहने से डरती है..
