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Mehfilaa ameera di || zindagi shayari
ਅਸੀਂ ਨਿਵੇਂ ਠਿਕ ਹਾਂ
ਏਹ ਮਹਿਫਲਾਂ ਅਮੀਰਾਂ ਦੀ
ਸਾਨੂੰ ਠਿਕ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ
ਸੁਕਿਆਂ ਰੋਟੀਆਂ ਖਾਂਦੇ ਆ
ਸਾਨੂੰ ਏਹ ਬਰਗਰ ਪਿਜੇਆ ਦੀ ਭੁਖ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ
ਨਿੱਕੀ ਉਮਰੇ ਛੁਟੀਆਂ ਸਾਥ ਮਾਪੇਆਂ ਦਾ
ਗੁਆਚ ਗਏ ਸੀ ਹਾੱਸੇ ਸਭ ਦਿਲ ਦੇ
ਪਾਲ਼ਿਆ ਸ਼ਾਇਦ ਦੁਆਵਾਂ ਨੇ ਮਾਂ ਦੀ ਆ
ਨੀ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਮਰ ਜਾਣਾਂ ਸੀ ਭੁਖੇ ਕਿਨੇਂ ਚਿਰ ਦੇ
ਸ਼ਬ ਗੁਆਚ ਜਾਵੇ ਮਾਪੇਆਂ ਦਾ ਸਾਥ ਗੁਆਚੇ ਨਾ
ਰੱਬ ਦੇ ਵਰਗੀਆਂ ਛਾਵਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਐਹਣਾ ਦੀਆਂ ਸਿਰ ਤੇ
ਹੁਣ ਬੱਸ ਬੇਬੇ ਬਾਪੂ ਬੁਲਾ ਲਵੇਂ ਅਪਣੇ ਪਾਸ਼
ਸਾਨੂੰ ਹੋਰ ਕੋਈ ਉਡੀਕ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ
ਸੁਕਿਆਂ ਰੋਟੀਆਂ ਖਾਂਦੇ ਆ
ਸਾਨੂੰ ਏਹ ਬਰਗਰ ਪਿਜੇਆ ਦੀ ਭੁਖ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
Title: Mehfilaa ameera di || zindagi shayari
Two line Hindi shayari collection || Hindi thoughts
ईर्ष्या एक मानसिक रोग, कोई भाव नहीं।
धुलाई इसकी इलाज, दवा कभी नहीं।
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स्वाधीन अगर होना है तो हम दोनों एक साथ मिलकर होंगें।
अगर दोनों में से कोई एक बंदी रहे गया तो दूसरे भी झेलेंगे।
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कोई किसी का गुलाम नहीं होता।
हम सब अपना मन का गुलाम हैं, दिल यही कहता।
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कौन कब किसका गुलाम था, यह नहीं है बड़ी बात।
हम अपना दुश्मनों को गुलाम नहीं, सिर्फ दोस्त बनायें, हमारी असली ताकत।
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ज्यादा सोचो मत, जो होगा देखा जायेगा।
सामना करो वक्त पर, ज्यादा सोचोगे तो जीवन रोक जायेगा।
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सही सोच कभी ज़िंदगी नहीं बनाती- सच यही।
सही काम और सही संस्कार जो बनाता हैं- खुद रहो सही।
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बाप दादा क्या काम किया हैं, वह कभी मत सोचो।
अपना मन पसंद काम पे शामिल हो और उन दोनों का मान बढ़ाओ।
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पिता से बड़ी माता, पितृतंत्र से बड़ी मातृशक्ति।
ताकत से बड़ी ममता और प्रेम से बड़ी भक्ति।
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अहंकार बेवकूफ का शस्र होता।
बेवकूफ असुर कुल का सदस्य होता।
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एक बार अगर आप ने अहंकार दिखा दिए, आप का पतन निश्चित।
देव गण बुद्धिमान हैं- कुटिलता अच्छी सोच और अच्छे विचार को कभी न कर पाती प्रभावित।
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बाहर की दुनिया फर्जी है।
अपने आप को देखो आपके अंदर में।
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दुनिया बहुत बुरी जगह है।
यहां दाहिना हाथ बायां हाथ से खेलता है।
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जल्दबाजी में कुछ करो, टिकता नहीं।
सोच समझकर आगे बढ़ो, टिकोगे सही।
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करते रहो, काम करते रहो, कुछ मांगो मत।
कामयाबी पकड़ेगी सामर्थ्य और पूछेगी योग्यता की बात।
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खुद को पूछो, अपनी योग्यता के बारे में।
उसके बाद मांगो, गलती से कुछ मांगना जुर्म है- योग्यता अनादर का डिब्बा में।
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हम महान बने सिर्फ माँ की वजह।
हम गुनहगार बने सिर्फ माँ की वजह।
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