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Maa❤️🥀 || punjabi shayari

Tenu kive bhulawa maa mein tere karke haan
Sab rishte jhuthe ne ik sacha rishta tera maa
Aajkal har rishte ch vad geya suaarth
Ik tera rishta nirsuarth meri maa..❤️🥀

ਤੈਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਭੁਲਾਵਾਂ ‘ਮਾਂ’ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਕਰਕੇ ਹਾਂ„
ਸੱਭ ਰਿਸ਼ਤੇ ਝੂਠੇ ਨੇ ਇਕ ਸੱਚਾ ਰਿਸ਼ਤਾ ਤੇਰਾ ‘ਮਾਂ’„
ਅੱਜਕਲ੍ਹ ਹਰ ਰਿਸ਼ਤੇ ‘ਚ ਵੜ ਗਿਆ ਸੁਆਰਥ„
ਇਕ ਤੇਰਾ ਰਿਸ਼ਤਾ ਨਿਰਸੁਆਰਥ ਮੇਰੀ ‘ਮਾਂ’.. ❤️🥀                   

Title: Maa❤️🥀 || punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


बेटियाँ /बेटी पर कविता || betiya || hindi poetry on daughters

रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ
घर की रौनक, उदासियों में खिलखिलाहट
अंधियारे में उजियारा होती हैं बेटियाँ..
जीवन डगर की बेशकीमती सौगात होती हैं ये बेटियाँ।
 
निश्छल मन के भावों से ओतप्रोत
चिलचिलाती धूप में भी शीतल छांव होती हैं बेटियाँ
उम्र के हर पड़ाव में, हर सुख-दुख में,
माता-पिता की परछाई होती हैं ये बेटियाँ।
 
जग कहे पराया धन बेटी को
पर इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह
कभी मां, कभी बहन..
ना जाने कितने रिश्तों में बंध जाती हैं ये बेटियाँ।
 
जब हर रिश्ते साथ छोड़ जाते हैं
तब पूर्ण समर्पण से अडिग साथ खड़ी रहती हैं ये  बेटियाँ
मां की ममता में पली,पिता के गर्व में लिपटी
स्वर्ग से उतरी परी होती हैं ये बेटियाँ।
 
परिवार को एक डोर में पिरोकर रखती हैं ये बेटियाँ
कम नहीं ये किसी से..
यूं समझ लो – बेमिसाल होती हैं बेटियाँ
रिश्तों की एक खूबसूरत एहसास होती हैं बेटियाँ।।

Title: बेटियाँ /बेटी पर कविता || betiya || hindi poetry on daughters


 जंगल की सैर

जग की हलचल तज उस ओर
जहाँ बसा है जंगल घोर
आओ आज वहां घूमेंगे
खुशियों में भरकर झूमेंगे
घने घने वन बने जहाँ पर
तरु समूह हैं तने जहाँ पर
जहाँ झाड़ियाँ खड़ी हुई हैं
पग पग बेलें पड़ी हुई हैं.
 
पथ है जहाँ बनाना मुश्किल
आदि अंत कुल पाना मुश्किल
जिसके भीतर जाना मुश्किल
जाकर के फिर आना मुश्किल
 
जंगल यह पशुओं का घर है
राजा जिनका शेर बबर है
कभी कभी जब वह दहाड़ता
आसमान के कान फाड़ता
 
इधर खड़ा है देखो चीता
झरने के तट पानी पीता
इसके तन पर काली धारी
यह है हिंसक मांसाहारी
 
देखों इधर तेंदुआ आता
बिल्ली का वंशज कहलाता
बिल्ली इसकी नानी लगती
किंतु देखते ही है भगती
 
हाथी सूंड उठाते हैं ये
ढेरों खाना खाते हैं ये
मस्त चाल से जाते हैं ये
वन में रौंद मचाते हैं ये
 
झाड़ी के अंदर खामोश
देखों बैठा है खरगोश
टूंग टूंग खाता है घास
कभी नहीं आता है पास
 
उधर हिरन भागे जाते है
चंचल ये मृग कहलाते हैं
पतली पतली इनकी टाँगें
कभी चौकड़ी कभी छंलागे
 
सुंदर इनके नयन सलौने
प्यारे लगते इनके छौने
सीधे सादे भोले भाले
जो भी चाहे इनको पाले
 

Title:  जंगल की सैर