Eh dollara di bhukh nhi maa,
Khwahish tere naal Bethan di aa❤️
ਇਹ ਡਾਲਰਾਂ ਦੀ ਭੁਖ ਨਹੀਂ ਮਾਂ,
ਖੁਆਇਸ਼ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਬੈਠਣ ਦੀ ਆ❤️
Eh dollara di bhukh nhi maa,
Khwahish tere naal Bethan di aa❤️
ਇਹ ਡਾਲਰਾਂ ਦੀ ਭੁਖ ਨਹੀਂ ਮਾਂ,
ਖੁਆਇਸ਼ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਬੈਠਣ ਦੀ ਆ❤️
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…