Motra da pani peeta
filtraa da peeta ni
koteyaa te kaara da
maan kade kita ni
ਮੋਟਰਾਂ ਦਾ ਪਾਣੀ ਪੀਤਾ
ਫਿਲਟਰਾ ਦਾ ਪੀਤਾ ਨੀ
ਕੋਠਿਆਂ ਤੇ ਕਾਰਾਂ ਦਾ
ਮਾਨ ਕਦੇ ਕੀਤਾ ਨੀ।
Motra da pani peeta
filtraa da peeta ni
koteyaa te kaara da
maan kade kita ni
ਮੋਟਰਾਂ ਦਾ ਪਾਣੀ ਪੀਤਾ
ਫਿਲਟਰਾ ਦਾ ਪੀਤਾ ਨੀ
ਕੋਠਿਆਂ ਤੇ ਕਾਰਾਂ ਦਾ
ਮਾਨ ਕਦੇ ਕੀਤਾ ਨੀ।
कुछ हलचल सी है सीने में
सुकून कुछ खोया – सा है
जाने कैसी है ये अनुभूति
दिल कुछ रोया – सा है
कुछ आहट सी आयी है
और दिल कुछ धड़का – सा है।
हाथ – पाँव में हो रही कंपन-सी
बेचैनी ये जानी पहचानी – सी है
सांसे भी है कुछ थमी – सी
कितने वक्त गुज़र गये इन्तजार में
मेरी आहें भी हैं कुछ जमी – सी।
पलकें अब मूँदने लगी हैं
साँसें अब क्षीण पड़ रही हैं
अब तो आ जाओ इन लम्हों में
जाने कब लौटोगे?
आने का वादा था और ना भी था तो,
तुम्हारा इन्तज़ार तो था..
सारी हदें तोड़ कर आ जाओ
दुनिया की रस्मों को छोड़ कर आ जाओ
चंद लम्हों के लिए ही,
अब तो आ जाओ
मेरे लिए.. सिर्फ मेरे लिए |
वो ग़ज़ल लिखते है,
और हम सुनते है।
वो सबपे लिखते है,
और हम नासमझ खुद पे समझते है।