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MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry

ਕਹਿੰਦੀ ਤੂੰ ਡਰਿਆ ਨਾ ਕਰ ਤੇਰੇ ਨਾਲ ਮੈਂ ਹੈਗੀ ਆ
ਤਪਦੀ ਧੁੱਪ ਤੇ ਵਿਚ ਦੁਪਹਿਰੇ 
ਜਲ ਗਈ ਚਮੜੀ ਤੇ ਸੁੱਖ ਗਏ ਚੇਹਰੇ
ਬੱਚੇ ਆਪਣੇ ਨੂੰ ਪਾਲਣ ਦੇ ਲਈ 
ਲੱਗੀ ਰਹੀ ਓਹ ਵਿਚ ਹਨੇਰੇ 
ਸੁੱਕ ਜਾਵੇ ਗਲ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਮੰਗੇ
ਲੋਕ ਵੇਖਦੇ ਰਹਿ ਗਏ ਚਾਰ ਚੁਫੇਰੇ 
ਮੂੰਹ ਦੇ ਵਿੱਚੋ ਉਫ਼ ਨਾ ਨਿਕਲੇ 
ਵੇਖ ਤਾਂ ਸਹੀ ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਦੇ ਜੇਰੇ…
ਚਾਰੋਂ ਪਹਿਰ ਕੰਮ ਆ ਕਰਦੀ 
ਭੁੱਲ ਗਈ ਹੱਸਣਾ ਤੇ ਆਰਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਚਾਰ ਪਾਈ ਤੇ ਨਾ ਪੈ ਕੇ ਵੇਖੇ 
ਲੱਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਵੀ 
ਪੈਰਾਂ ਵਿਚ ਛਾਲੇ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਤੁਰਕੇ 
ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਗੋਦ ਚੋਂ ਲਾਹੁੰਦੀ ਨਈ 
ਨਾ ਖਾਣ ਦੀ ਫ਼ਿਕਰ ਨਾ ਸੌਣ ਦੀ 
ਓਹ ਤਾਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ਅੱਖ ਵੀ ਲਾਉਂਦੀ ਨਈ 
ਰਾਤ ਹਨੇਰੇ ਡਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ
ਹਰ ਸਪਨੇ ਦੇ ਵਿਚ ਮਰ ਜਾਵਾ ਮੈਂ 
ਤੈਨੂੰ ਲੈ ਜਾਣਾ ਮੈਂ ਨਾਲ ਆਪਣੇ
ਮੌਤ ਮੈਨੂੰ ਕਹਿਗੀ ਆ 
ਮੱਥਾ ਚੁੰਮ ਮੈਨੂੰ ਮਾਂ ਮੇਰੀ ਆਖੇ ਡਰ ਨਾ ਪੁੱਤ ਮੈ ਹੈਗੀ ਆ
– ਮਾਂ ਕਿਵੇਂ ਝੁਕਾਵਾਂ ਕਰਜ ਤੇਰਾ 
ਮੈਨੂੰ ਸਮਝ ਇਹ ਆਈ ਨਾ 
ਮੈਂ ਬਣ ਜਾਣਾ ਤੇਰਾ ਸਹਾਰਾ ਮਾਂ 
ਤੂੰ ਸ਼ਰਨ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ 
ਮਾਂ ਮੈਨੂੰ ਛੱਡ ਕਦੇ ਜਾਵੀਂ ਨਾ…

Title: MAIN HAIGI AA ..! Maa || punjabi poetry

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Galti unki nahi || hindi status

गलती उनकी नहीं है
जो आपको सता रहे है
गलती आप की है
जो आप उनके झांसे मे आ रहे है

Title: Galti unki nahi || hindi status


Phoolo ne kabhi || Shayari

फूलों ने कभी तोड़ने का दर्द कहा है,
कांटों ने ही हमेशा दुश्मनी निभाई है;
मोहब्बत भी फना का ही एक और नाम है,
यह रूसवा तो​ हुई है, पर इसने हमेशा वफादारी निभाई है।

ऐ चांद तेरे आने का सबब सबको मालूम नहीं,
कुछ लोग दिया जलाते हैं, और कुछ दिल जलाते हैं;
या वो अच्छी हैं या बुरी, हसरतें तो अपनी हैं,
मगर लोग अक्सर दाग तुझ पर लगाते हैं।

ऐ मेरे दोस्त तू समन्दर बन जा,
क्या खोया क्या पाया इसकी चाहत न कर;
तेरे अंदर ही एक मुकम्मल जहां है,
तू बाहर से किसी और की आस न कर।

मुमकिन है कि मंजिलें मुझसे दूर बहुत हैं,
पर रास्ते पर चलना मेरी फितरत बन गयी है;
उजाले समेटने में कोई वाहवाही नहीं,
अन्धेरों में रोशनी करना मेरी आदत बन गयी है।

ऐसे चलो कि चल के फिर गिरना न पड़े,
इतना उठो कि उठ के फिर झुकना न पड़े;
लेकिन गिरना, उठना तेरे बस में नहीं ऐ दोस्त,
इसलिए उसका हाथ पकड़ के चलो कि फिर रोना न पड़े।

मां के हाथों की बरकत का अंदाजा इस से हो गया,
थी एक वक्त की रोटी हर रोज,
और तीस वर्ष तक गुजारा हो गया;
आज रोटी तो है हर वक्त की, लेकिन वो वक्त कहीं पर खो गया।

ऐ जिंदगी, ये तेरे सवाल की तारीफ नहीं,
यह मेरे जवाब का हुनर कि जिंदगी की उलझने सुलझती चली गयीं;
मैं तो बस अपने दिल की कह रहा था,
और कहानियां बनती चली गयीं।

न थी जिंदगी से शिकायत,
न वक्त से कुछ गिला था;
जो मुझको नहीं मिला,
वो खुद मेरा ही सिला था;
मदद-ओ-मशवरे कम नहीं थे मददगारों के,
पर अफसोस जो तकदीर ने दिया था वह दर्द ही मुझे मिला था।

ऐ वतन कर्ज तो तेरा मैं जब उतारूं, जब मेरे पास कुछ अपना भी हो; तेरी मिट्टी, तेरा पानी, तेरी हवा, तेरी धूप, तेरी छांव, तेरी रोटी और नाम तेरा, फिर भी बस एक कतरा ही बन पाउं तेरा, तो मैं समझूं और तुझको मैं अपना पुकारूं।

जिंदगी जीने का अंदाज तो आया मगर अफसोस,
वो मुकम्मल एहसास नहीं आया;
वो हुनर तो आया मगर,
ऐ बदनसीबी वो मुकाम कभी नहीं आया।

यूं गलतफहमियां पाला न करो,कभी आईने में खुद को निहारा भी करो; ये जो चेहरा है वो सब कुछ बयां कर देता है; कभी इसको जुबां पर उतारा भी करो।

आशुतोष श्रीवास्तव

Title: Phoolo ne kabhi || Shayari