Mainu likhna tu sikha gya,
Jazbaat bhi chouli paagya,
Deke zakham mainu tu ishqaan de,
Bewafa da naam kmaa gya…!!
Mainu likhna tu sikha gya,
Jazbaat bhi chouli paagya,
Deke zakham mainu tu ishqaan de,
Bewafa da naam kmaa gya…!!
Chen gawayiaa, bulaan de haase gawye
mere kol hun kujh ni bachiyaaa
sirf ehna nakami lakeeran ton siwaaye
ਚੈਨ ਗਵਾਇਆ, ਬੁਲਾਂ ਦੇ ਹਾਸੇ ਗਵਾਏ
ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਹੁਣ ਕੁਝ ਨੀ ਬੱਚਿਆ
ਸਿਰਫ ਇਹਨਾ ਨਾਕਾਮੀ ਲਕੀਰਾਂ ਤੋਂ ਸਿਵਾਏ
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।