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Majbooriyaan || Love sad punjabi shayari

Majbooriyaan bande ton ki kuj ni kraundiyaan,
Zindagi tabaah hojandi aa ehna pichhe,
Aisiyaan hi majbooriyaan cho ik majboori meri jaan di c,
Pta ohnu bhi c, te pta mainu bhi c ki sadda koi future nahi aa,
Taahi door hogye, door hunde hunde saare khaab sogye…..

Ehh shayari ohde layi hi aa……….

Tu door nahi, ajj bhi kol aa mere,
Jina nu sunke zinda haan main, oh kahe gye bol aa tere,
Main khfa nahi haan tere ton, bs kuj k dil de hol aa mere,
Jina nu yaad kar kar zinda haan main, oh janne bss bol aa tere…..

Title: Majbooriyaan || Love sad punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Bachpan Beet Gaya – Hindi Kavita on Life || zindagi Bachpan poetry

बचपन ब़ीत गया लडकपन मे,
ज़वानी बीत रहीं घर बनानें मे,
ज़ंगल सी हो गयी हैं जिन्दगी,
हर कोईं दौड रहा आन्धी के गुबार मे।
 
हर रोज़ नईं भोर होती,
पर नही ब़दलता जिन्दगी का ताना ब़ाना,
सब कर रहें है अपनीं मनमानी,
लेक़िन जी नही रहें अपनी जिन्दगानी।
 
कोईं पास बुलाये तो डर लग़ता हैं,
कैंसी हो गईं हैं यह दुनियां बेईंमानी,
सफ़र चल रहा हैं जिन्दा हू कि पता नही,
रोज लड रहा हू चन्द सासे ज़ीने के लिये।               

मिल नही रहा हैं कोई ठिकाना,
जहा दो पल सर टिक़ाऊ,
ऐसें सो जाऊ की सपनो में ख़ो जाऊ,
बचपन की गलियो में खो जाऊ।
 
वो बेंर मीठें तोड लाऊ,
सूख़ गया जो तालाब उसमे फ़िर से तैंर आऊ,
मां की लोरीं फिर से सुन आऊ,
भूल जाऊ जिन्दगी का यें ताना बाना।
 
देर सवेंर फ़िर से भोर हो गईं,
रातो की नीद फ़िर से उड गईं,
देख़ा था जो सपना वो छम सें चूर हो ग़या,
जिन्दगी का सफ़र फिर से शुरू हों गया।               

आंखो का पानी सूख़ गया,
चेहरें का नूर कही उड सा गया,
अब जिन्दगी से एक़ ही तमन्ना,
सो जाऊ फ़िर से उन सपनो की दुनियां मे।

Title: Bachpan Beet Gaya – Hindi Kavita on Life || zindagi Bachpan poetry


Jab sath ho tum || hindi poetry || love poetry

मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब राहो में मेरे साथ हो तुम।

मुझे नहीं चाहिए दौलत सूरत
मेरी इक बस अरमान हो तुम।

बंजर पड़ी मेरी ज़िंदगी को
शोभन करे वो बरसात हो तुम।

मेरी कौफ सी काली रातो को
रोषण करे वो चांद हो तुम।

मेरा दिन बन जाता लबो पे आते
वो खुदा सुनहरा नाम हो तुम।

मेरी हर मुश्किल को चीर के आगे
वो धनुष से निकला बान हो तुम।

मेरी हर दर्द को दुर करे
मलहम सा लगा बाम हो तुम।

मुझे क्या जरूरत किसी ऑर सक्स की
जब हर लम्हों में साथ हो तुम।

मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।

जो तन को पल में सीतल कर दे
वो सुबह की पहली आजन हो तुम।

जो सह ले हर करवी बाते
वो मधुर मीठी मुस्कन हो तुम।

जो राहत से भितम गरमी से
वो पेरो की ठंडी छाओ हो तुम।

खोल दे आखे सही वक्त पे
वो शोर करती आलार्म हो तुम।

मुझे तालाश नहीं कोई मंजिल की
जब रहो में मेरे साथ हो तुम।।

Title: Jab sath ho tum || hindi poetry || love poetry