Yun na najarandaaj karna mushkilo ko apni manzil takk pahuchane me sabse bada hath ini ka hai
यूं ना नजरंदाज करना मुश्किलों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने में सबसे बड़ा हाथ इन्ही का है
Yun na najarandaaj karna mushkilo ko apni manzil takk pahuchane me sabse bada hath ini ka hai
यूं ना नजरंदाज करना मुश्किलों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने में सबसे बड़ा हाथ इन्ही का है
सुना है लोग तुझे आँखें भरकर देखते हैं , है मन में क्या उनके ये तो सवाल कर ।
माना लोगों की फितरत अब अच्छी नहीं , अपनी इज्जत का तू तो ज़रा ख्याल कर ।।
बादस्तूर चलती रही नाराजगी जिंदगी में , वक्त बेवक्त काफिर सा न मेरा हाल कर ।
मेरी आदतों में शूमार है तेरी मोहब्बत का सबब , खुदा का शुक्र मना बेवजह न मलाल कर ।।
बागी मिजाज़ रहा दिल का चाहतों के गुबार में , जिससे कभी मोहब्बत थी उससे अब नफरत भी बेमिसाल कर ।
क्या हुआ जो दुआ भी कुबूल न हुई , हासिल कर अपने दर्द को कुछ तो अब बवाल कर ।।
ना कोई गुनाह किया , ना कोई मुकदमा हुआ..!
ना अदालत सजाई गई, ना कोई दलिले हुई..!
किस किस से मांगे हम गवाही वफ़ा कि !
उसने छोड़ा भरे बाज़ार हमे, ये ज़माना जानता है!