मंजिल तो मिल ही जाएगी भटकते ही सही
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं
मंजिल तो मिल ही जाएगी भटकते ही सही
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं
Haa thodi udaas jehi ho jaani aa
jado koi koi kehnda
ajh kal oh kithe ne
jinu apni duniyaa daseyaa lkardi si
ਹਾ ਥੋੜੀ ਉਦਾਸ ਜਹੀ ਹੋ ਜਾਨੀ ਆ
ਜਦੋ ਕੋਈ ਕੋਈ ਕਹਿੰਦਾ
ਅੱਜ ਕੱਲ ਉਹ ਕਿਥੇ ਨੇ
ਜਿਨੂੰ ਆਪਣੀ ਦੁਨੀਆਂ ਦੱਸਿਆ ਕਰਦੀ ਸੀ
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।