ਮੌਤ ਦੀ ਗੋਦ ਵਿੱਚ ਸੌਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ ਹੈ
ਉਹਦੀ ਯਾਦ ਆਉਂਦੀ ਜਦੋਂ, ਪਤਾ ਨੀ ਕਿਉਂ
ਇਕੱਲਾ ਬਹਿ ਕੇ ਰੋਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ
maut di gaud vich saun nu g karda
ohdi yaad aundi hai jadon, pata ni kyu
ekalla beh k raun nu g karda
ਮੌਤ ਦੀ ਗੋਦ ਵਿੱਚ ਸੌਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ ਹੈ
ਉਹਦੀ ਯਾਦ ਆਉਂਦੀ ਜਦੋਂ, ਪਤਾ ਨੀ ਕਿਉਂ
ਇਕੱਲਾ ਬਹਿ ਕੇ ਰੋਣ ਨੂੰ ਜੀ ਕਰਦਾ
maut di gaud vich saun nu g karda
ohdi yaad aundi hai jadon, pata ni kyu
ekalla beh k raun nu g karda

गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!