मैं हकीकत लिखूं या फसाना लिखूं,
उसको ना देखने का बहाना लिखूं,
बेतहाशा अगर है मोहब्बत उसे ,
नाम उसके मैं एक जिंदगानी लिखूं।
🙈❤️😘
मैं हकीकत लिखूं या फसाना लिखूं,
उसको ना देखने का बहाना लिखूं,
बेतहाशा अगर है मोहब्बत उसे ,
नाम उसके मैं एक जिंदगानी लिखूं।
🙈❤️😘
किसी न किसी पे किसी को ऐतबार हो जाता है ,
अजनबी कोई शख्स यार हो जाता है ,
खूबियों से नहीं होती मोहब्बत सदा ,
खामियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है 🥀
किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी कसैली बात लिखूं ,
मैं सच लिखूं के अपने हालत लिखूं ,
कैसे लिखूं मैं चांदनी रातें ,
जब गरम हो रेत तो कैसे मैं बरसात लिखूं .✨
सभी नग्मे साज़ में गाये नहीं जाते ,
सभी लोग महफ़िल में बुलाये नहीं जाते ,
कुछ पास रह कर भी याद नहीं आते ,
कुछ दूर रह कर भी भूलाये नहीं जाते!❤️
Asi khush v nahi te has v rahe aa
jehde bina ik pal v nahi si reh hunda
hun ohde bina zindagi kat rahe aa
ਅਸੀਂ ਖੁਸ਼ ਭੀ ਨਹੀਂ ਤੇ ਹੱਸ ਵੀ ਰਹੇ ਆਂ ਜਿਹਦੇ ਬਿਨਾ ਇਕ ਪਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਰਹਿ ਹੁੰਦਾ ਹੁਣ ਓਹਦੇ ਬਿਨਾ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੱਟ ਵੀ ਰਹੇ ਆਂ 💔😭