मैं मौत के हुजूम में पल रहा हूँ
छाव मे ही सही पर काँटों पर चल रहा हूँ
बस से बाहर जा रहा है हालातों का दौर
जीने की ख़्वाहिश लिए पल पल मर रहा हूँ ….
जिंदगी इतने सितम ढाह रही है
और मैं एक मूठी चीनी लिए समुंदर मे फिर रहा हूँ ।
मैं मौत के हुजूम में पल रहा हूँ
छाव मे ही सही पर काँटों पर चल रहा हूँ
बस से बाहर जा रहा है हालातों का दौर
जीने की ख़्वाहिश लिए पल पल मर रहा हूँ ….
जिंदगी इतने सितम ढाह रही है
और मैं एक मूठी चीनी लिए समुंदर मे फिर रहा हूँ ।
खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।
वो शखस मुझे पल भर में,
खुश और उदास करने की ताक़त रखता है🫣❤️