मैं मौत के हुजूम में पल रहा हूँ
छाव मे ही सही पर काँटों पर चल रहा हूँ
बस से बाहर जा रहा है हालातों का दौर
जीने की ख़्वाहिश लिए पल पल मर रहा हूँ ….
जिंदगी इतने सितम ढाह रही है
और मैं एक मूठी चीनी लिए समुंदर मे फिर रहा हूँ ।
Enjoy Every Movement of life!
मैं मौत के हुजूम में पल रहा हूँ
छाव मे ही सही पर काँटों पर चल रहा हूँ
बस से बाहर जा रहा है हालातों का दौर
जीने की ख़्वाहिश लिए पल पल मर रहा हूँ ….
जिंदगी इतने सितम ढाह रही है
और मैं एक मूठी चीनी लिए समुंदर मे फिर रहा हूँ ।

Aksar gusse mai todh dete hai vaade,
Bhoolta koi nahin hai aati rehti hai yaade,