Skip to content

Metainu

  • by

Title: Metainu

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Tu jaandi ni menu ||hindi punjabi shayari

तू जांदी नी मेनू…

हाय…

याद तेरे हाथ दी हर इक लकीर

तेरे हाथ ते लिखी हर तकदीर

तेरे नाल घूमे राह

मीनू याद तेरा हर साह

तेरे बुल…तेरी बोली

तेरियां अखां.. तेरी तकनी..

तेरे दंद..तेरा हस्सा

तू..तेरी खुशबू

तेरा चेहरा…ते चन्न

मैनू याद आ सब

याद है वो भी… जो बताया नही तूने

याद है वो भी….जो जताया नहीं तूने..

मेरे आस पास होना और हमेशा रहने की चाह…

मुझे याद है तेरे दिल से निकली हर राह..

तेरी राहों पर चलने वाली मै अकेली बनना चाहती थी..

तुझे ढूंढते ढूंढते.. मै खुद तुझमे खोना चाहती थी..

पा कर भी सुकून नहीं था… सुकून मिल कर भी सुकून नहीं था.. तुझे पाना सुकून नहीं था… मै तो तू बनना चाहती थी….

जेह मेनू मिलदा नी तू..

एम फेर वी तेनु जांदी हुंदी..

तेरे हत्था नू फड के लकीरा दा राज पूछदी हुंदी….

तेरे गले लग के तेरे हाल पूछदी हुंदी..

तेरे नाल घुम घुम के….फुलां दे ना पूछदी हुंदी..

जेह मेनू मिल्दा नी तू.. एम फेर वी तेनु जांदी हुंदी..

जन के सब कुछ…मै अंजन बंदी हुंदी…

बार बार इको ही सवाल पूछदी हुंदी…

तेनु ना कर के ओही काम करदी हुंदी…

तेनु जो रंग पसनद.. मै ओह रंग च फबड़ी हुंदी…

तेनु पसंद जो धंग.. उस धंग.. सजना साजन मै सजदी हुंदीतू जांदी नी मेनू…

हाये…

हां.. मै जांदी आ…. तू पुछ के तां वेख…. तेरे स्वाला दा जवाब म जांदी आ .. तेरे फुलां दा ना मै जांदी आ… सब जांदी आ मै…. पर पुछना पसंद आ मेनू… जो जांदी आ… ओह वी पुछना पसंद आ… सवाल ख़त्म हो गए तां…. जो पता ओह वी पुछना आ मैनू…. सब कुछ तैथो पुछना आ‌ मैनू… तेरे अलवा किसी तीजे दा ना वी पसंद मेनू

मै जंदी अउ तेनु..

हां…… मै जांदी आ

ते बस तेनु..

हां…… म जांदी आ

Title: Tu jaandi ni menu ||hindi punjabi shayari


Kalam e Takat || Punjabi Ghaint shayari

Utha rahe hai bojh jo dard-e fidrat ka
ek din ho jayege rukhsat-e wazaad
kyu na kar jaye halat-e byaan zindagi
ek naye nazariye kalam-e faisle se

Na ho maloom to waadiyaa-e gulshan se
kal le kujh sawaal-e kyamat hazoor
mil jayega har jawab-e dastoor faisla
jo ho teri kismat ka jawa-e khuda kabool

ਉਠਾ ਰਹੇ ਹੈ ਬੋਝ ਜੋ ਦਰਦ-ਏ ਫਿਦਰਤ ਕਾ,
ਏਕ ਦਿਨ ਹੋ ਜਾਏਂ ਗੇ ਰੁਖ਼ਸਤ -ਏ ਵਜੂਦ
ਕਿਉਂ ਨਾ ਕਰ ਜਾਏ ਹਾਲਾਤ-ਏ ਬਿਆਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ
ਏਕ ਨਏ ਨਜ਼ਰੀਆ ਕਲਮ-ਏ ਫੈਸਲੇ ਸੇ

ਨਾ ਹੋ ਮਾਲੂਮ ਤੋ ਵਾਦੀਆ-ਏ ਗੁਲਸ਼ਨ ਸੇ
ਕਰ ਲੇ ਕੁਝ ਸਵਾਲ-ਏ ਕਿਆਮਤ ਹਜੂਰ
ਮਿਲ ਜਾਏ ਗਾ ਹਰ ਜਵਾਬ-ਏ ਦਸਤੂਰ ਫੈਸਲਾ
ਜੋ ਹੋ ਤੇਰੀ ਕਿਸਮਤ ਕਾ ਜਵਾਬ-ਏ ਖੁਦਾ ਕਬੂਲ✍️ ਰਣਜੋਧ ਸਿੰਘ

Title: Kalam e Takat || Punjabi Ghaint shayari