के आपकी मेहनत
और कोशिश पर ये
लोग एक दिन है रहे होगे
मगर एक दिन इनके
झुके हुए सिर आपकी
कामयाबी के गवाह होगे
के आपकी मेहनत
और कोशिश पर ये
लोग एक दिन है रहे होगे
मगर एक दिन इनके
झुके हुए सिर आपकी
कामयाबी के गवाह होगे
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए
ਮੁਹੱਬਤ ਸਿਰਫ ਮਹਿਬੂਬ ਲਈ ਨਹੀਂ ਬਣੀ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਇਹ ਖੁਦ ਨੂੰ
ਮਹੋਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੋਈਏ ਜੁਦਾ ਨੂੰ ਵੀ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਆਕਾਸ਼ ਨੂੰ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਰਾਹ ਨੂੰ ਵੀ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਇਕ ਮਾਂ ਨੂੰ
ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਬਾਪ ਦੇ ਹਰ ਇਕ ਸਾਹ ਨੂੰ ਵੀ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਇਕ ਬੇਈਮਾਨ ਨੂੰ
ਮੁਹੱਬਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਵੇਚੇ ਹੋਈਏ ਇਮਾਨ ਨੂੰ ਵੀ
ਇੰਦਰ