
Asin tan khud aapniyaan mehflan diyaan
tahniyaan chhang aaye
tel unde hoye v khushi te diwe bujaa aye

Asin tan khud aapniyaan mehflan diyaan
tahniyaan chhang aaye
tel unde hoye v khushi te diwe bujaa aye
Sachi bachpan de din awalle si
nit ghumde firde kalle si
na koi rona-dhona si
na kise da chahunde hona si
nit beparwaah te jhalle si
sachi bachpan de din awalle c
ਸੱਚੀ ਬਚਪਨ ਦੇ ਦਿਨ 😅ਅਵੱਲੇ ਸੀ..
ਨਿੱਤ ਘੁੰਮਦੇ ਫਿਰਦੇ 💝ਕੱਲੇ ਸੀ..
ਨਾ ਕੋਈ ਰੋਣਾ-ਧੋਣਾ🤷🏻♂️ ਸੀ..
ਨਾ ਕਿਸੇ ਦਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋਣਾ 😏ਸੀ..
ਨਿੱਤ ਬੇਪਰਵਾਹੇ ਤੇ ਝੱਲੇ😄 ਸੀ..
ਸੱਚੀ ਬਚਪਨ ਦੇ ਦਿਨ 😅ਅਵੱਲੇ ਸੀ.. kuldeep kaur
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥