Jab aap khwab bunte hoo.
Tab aap apna aap chunte ho..
Mehnat ke liye..
Uncha udne ke liye..
जब आप खवाब बुनते हो।
तब आप अपना आप चुनते हो।
मेहनत के लिऐ।
ऊचा उडने के लिऐ।
Jab aap khwab bunte hoo.
Tab aap apna aap chunte ho..
Mehnat ke liye..
Uncha udne ke liye..
जब आप खवाब बुनते हो।
तब आप अपना आप चुनते हो।
मेहनत के लिऐ।
ऊचा उडने के लिऐ।
Shaam ek umar ki trah, dheere dheere dhal rahi hai
Kehne ko to khas nhi, zindagi fir bhi chal rahi hai
Behtreen lamho ko yaad kar, gamo ko bhulane ki chaht mein
Aaj ke din ko aur khatam kar, raat bhi nikal rahi hai…
शाम एक उर्म की तरह, धीरे धीरे ढल रही है..
कहने को तो खास नहीं, जिंदगी फिर भी चल रही है..
बेहतरीन लम्हों को याद कर, गमों को भुलाने की चाहत में..
आज के दिन को और खत्म कर, रात भी निकल रही है….
वो आसमन मै फैला उजाला है,
या मेरे घुस्से पर लगा ताला|
वो पहाडो की चोटी पर सुरज की किरण है,
या जिंदगी सही जिने का आचरण|
वो ना हो तो वर्णमाला अधुरी है,
वो जो सबसे ज्यादा जरुरी है|
डाटता हु तो चुप हो जाती है,
फिर मेरी गोद मै आ कर सिसककर रोती है|
वो मुझसे मेहेंगे तौफे या खिलोने नही चाहती,
वो तो बस कुछ वक्त मेरे साथ बिताना चाहती है|
लोग केहते है बेटिया तो पराया धन होती है,
पर एक बाप से पूछो वो उसके जिनेका मकसद होती है|
बेटीया तो सिर्फ बेटीया होती है|