Kuch toh baat hogi aapme Jo hum aapke Ishq mein gir pade
Kuch toh harkat aapne bhi ki hogi yuhi nahi hum akele they zid pe ade
Kuch toh baat hogi aapme Jo hum aapke Ishq mein gir pade
Kuch toh harkat aapne bhi ki hogi yuhi nahi hum akele they zid pe ade
कोई ख्वाहिश नहीं आपसे
न किसी और की तुम करना मेरे होते.
I don’t have any desire from you nor you keep any desire from anyone else until I am there.
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है