Meri kami da v sajjna tainu ehsaas howe,
Tu mainu milan aawe, te agge meri laash howe….
Meri kami da v sajjna tainu ehsaas howe,
Tu mainu milan aawe, te agge meri laash howe….
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।
maana ki shehar me teri khoob-soorti ke charche hai
kabhi aakar to dekh mere gaao me to pata chalega ki tere yaar ke kitne bachhe hai
माना की शहर में तेरी खूबसूरती के चर्चे हैं
कभी आकर तो देख मेरे गांव में तो पता चलेगा की तेरे यार के कितने बच्चे हैं