Meri swer bdi sohni hundi aa
Jad rajai cho mooh bahr kadda
Meri maa chaa lai ke khadi hundi aa❤
ਮੇਰੀ ਸਵੇਰ ਸੋਹਣੀ ਬੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ”
ਜਦ ਰਜਾਈ ਚੋ ਮੂੰਹ ਬਾਹਰ ਕੱਢਾ”
ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਚਾਹ ਲੈਕੇ ਖੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ।❤️
Meri swer bdi sohni hundi aa
Jad rajai cho mooh bahr kadda
Meri maa chaa lai ke khadi hundi aa❤
ਮੇਰੀ ਸਵੇਰ ਸੋਹਣੀ ਬੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ”
ਜਦ ਰਜਾਈ ਚੋ ਮੂੰਹ ਬਾਹਰ ਕੱਢਾ”
ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਚਾਹ ਲੈਕੇ ਖੜੀ ਹੁੰਦੀ ਆ।❤️
Tujhe palko pe bithane ko jee chahta hai
Teri baho se lipatne ko jee chahta hai,
Khubsurti ka intehaa hain tu,
Tuje zindagi me basane ko jee chahta hai.
ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
…………………………………………..
गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
……………………………………………
बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
…………………………………………….
कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
………………………………………………
इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
………………………………………………….
कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
………………………………………………………
जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।