मेरी तकलीफ़ किसने जानी,
वो अपने में मगरूर था,
दर्द ना दिखा उसे मेरा,
वो दूसरों में खोया था।
मेरी तकलीफ़ किसने जानी,
वो अपने में मगरूर था,
दर्द ना दिखा उसे मेरा,
वो दूसरों में खोया था।
कुछ अधूरे ख़्वाब जगा जाते हो,
मायूस चेहरे की मुस्कान जगा जाते हो...
सुबह पहली किरण भी तुम्हारी सादगी देखने आती है,
सांझ की रौशनी तुम्हारी जुल्फों में खो जाती है...
हवाएं तुमसे खुशबू लेकर चल रही हैं,
वो तितलियां भी तुम्हारे लबों सी खिल रही है...
कैसे बताऊं तुम्हे जैसे तुम इक किस्सा हो,
मेरी ज़िन्दगी हो मेरा इक हिस्सा हो...
हमारा तिरंगा
देश का प्रतीक है यह,
हर हिंदुस्तानी के नज़दीक है यह।
हर डर भुला देता है,
एक जोश जगा देता है।
सूरज सा ‘नारंगी’ तेज है इसमें,
शांति का ‘सफेद’ संदेश है इसमें।
इसमे खुशिओं की ‘हरियाली’ है,
यह चक्रवर्ती ‘चक्रधारी’ है।
वो फसलों सा लहराता है,
वो हर ऊंचाई से ऊपर जाता है।
एक बच्चे सा भोला है यह,
वक़्त पड़ने पर दहकता शोला है यह।
मित्रों का मीत है यह,
हर बुराई पर जीत है यह।
जीने का अंदाज़ है यह,
अपनी माटी का एहसास है यह।
इसकी अलग ही शान है,
यह हमारा तिरंगा महान है।।