Enjoy Every Movement of life!
वफ़ा की बाते तुम क्यू किया करती थीं
जूठे वादे तुम क्यू निभाया करती थीं
अब तो सजा – ए – जख्म इतने मिल रहे है मुर्सद
की अब तो दिल भी कह रहा है वो मोहब्ब्त ही तुमसे क्यू किया करती थी ।।
Mohabbat ko juban se baya nahi kar paya kabhi unko
Wo gunge hote to isharo ko samjh jate🤐
मोहोब्बत को ज़ुबान से बयां नही कर पाया कभी उनको
वो गूंगे होते तो इशारों को समझ जाते 🤐
