mohabbat bhee hotee hai to zarurat ke pesh-e-nazar,
ab ek nazar mein lut jaane ka zamaana nahin raha…
मोहब्बत भी होती है तो ज़रुरत के पेश-ए-नज़र,
अब एक नज़र में लुट जाने का ज़माना नहीं रहा…
mohabbat bhee hotee hai to zarurat ke pesh-e-nazar,
ab ek nazar mein lut jaane ka zamaana nahin raha…
मोहब्बत भी होती है तो ज़रुरत के पेश-ए-नज़र,
अब एक नज़र में लुट जाने का ज़माना नहीं रहा…
मचलते ख़्वाब दिल की दीवारें तोड़ जाएंगे,
कुछ होंठो को हंसा कर कुछ को तड़पता छोड़ जाएंगे...
तेज़ आधियों में आशियाना बनाने की कोशिश जारी है,
ताजुर्बा है, वहीं ख़्वाब मंज़िल के साथ नजर आएंगे...
वो भी हमको मिल गया है क्या सितम है,
ग़म ही ग़म है क्या ही क्या है क्या सितम है।
देख ले इक मर्तबा तेरी तरफ़ जो,
रात दिन मांगे दुआ है क्या सितम है।
ज़िंदगी मेरी कहीं बस बीत जाए
बे वफ़ा तो हो गया है क्या सितम है।
इश्क़ तेरा अब जहर सा हो गया है,
वो जहर ही अब दवा है क्या सितम है।
आज कल घर से निकलते ही नहीं हो,
यार तुमको क्या हुआ है क्या सितम है।