Loki puchhde ne aksar
ki karda haan me
ki dassan me ohna nu
roj parda han me ohnu
roj likhda han me ohnu
ਲੋਕੀ ਪੁਛਦੇ ਨੇ ਅਕਸਰ
ਕੀ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਮੈਂ
ਕੀ ਦੱਸਾਂ ਮੈਂ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ
ਰੋਜ਼ ਪੜ੍ਹਦਾ ਹਾਂ ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ
ਰੋਜ਼ ਲਿਖਦਾ ਹਾਂ ਮੈਂ ਉਹਨੂੰ
जाने कहाँ बैठकर देखती होगी, वो आज जहां भी रहती है..
नाराज़ है वो किसी बात को लेकर, सपनों में आकर कहती है..
मैं याद नहीं करता अब उसको, चुप-चाप देखकर सहती है..
वो चली गई भले दुनिया से, मेरे ज़हन में अब भी रहती है..
उसे चाहता हूँ पहले की तरह, ये तो वो आज भी कहती है..
किसी और संग मुझे देख-ले गर जो, वो आज भी लड़ती रहती है..
ना वो भूली ना मैं भुला, भले भूल गई दुनिया कहती है..
रहती थी पहले भी पास मेरे, मेरे साथ आज भी रहती है..