
Ohnu haigi nahio ishke di asli jehi saar..!!
Socha ohdiyan te hun dasso sade kahde zor
Mohobbat mere layi kuj hor e te ohde layi kuj hor..!!

एक दिन बीरबल बाग में टहलते हुए सुबह की ताजा हवा का आनंद ले रहा था कि अचानक एक आदमी उसके पास आकर बोला, “क्या तुम मुझे बता सकते हो कि बीरबल कहां मिलेगा ?”
“बाग में।” बीरबल बोला।
वह आदमी थोड़ा सकपकाया लेकिन फिर संभलकर बोला, “वह कहां रहता है ?”
“अपने घर में।” बीरबल ने उत्तर दिया।
हैरान-परेशान आदमी ने फिर पूछा, “तुम मुझे उसका पूरा पता ठिकाना क्यों नहीं बता देते ?”
“क्योंकि तुमने पूछा ही नहीं।” बीरबल ने ऊंचे स्वर में कहा।
“क्या तुम नहीं जानते कि मैं क्या पूछना चाहता हूं ?” उस आदमी ने फिर सवाल किया।
“नहीं।’ बीरबल का जवाब था।
वह आदमी कुछ देर के लिए चुप हो गया, बीरबल का टहलना जारी था। उस आदमी ने सोचा कि मुझे इससे यह पूछना चाहिए कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ? वह फिर बीरबल के पास जा पहुंचा, बोला, “बस, मुझे केवल इतना बता दो कि क्या तुम बीरबल को जानते हो ?” “हां, मैं जानता हूं।” जवाब मिला।
“तुम्हारा क्या नाम है ?” आदमी ने पूछा।
“बीरबल।” बीरबल ने उत्तर दिया।
अब वह आदमी भौचक्का रह गया। वह बीरबल से इतनी देर से बीरबल का पता पूछ रहा था और बीरबल था कि बताने को तैयार नहीं हुआ कि वही बीरबल है। उसके लिए यह बेहद आश्चर्य की बात थी।
“तुम भी क्या आदमी हो…” कहता हुआ वह कुछ नाराज सा लग रहा था, “मैं तुमसे तुम्हारे ही बारे में पूछ रहा था और तुम न जाने क्या-क्या ऊटपटांग बता रहे थे। बताओ, तुमने ऐसा क्यों किया ?”
“मैंने तुम्हारे सवालों का सीधा-सीधा जवाब दिया था, बस !”
अंततः वह आदमी भी बीरबल की बुद्धि की तीक्ष्णता देख मुस्कराए बिना न रह सका।
ਟਾਲਦਾ ਰਵੀ ਤੂੰ ਤੇਰੀ ਮੇਰੀ ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਬਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਜੇ ਚਾਹਾਂ ਉਸ ਰੱਬ ਨੇ ਓਹਣੇ ਬਦਲ ਦੇਣਾ ਐ ਹਲਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਫਿਰ ਤੇਰਾ ਵੀ ਕੋਈ ਜ਼ੋਰ ਨੀ ਰੇਹ ਨਾ ਇਸ ਦਿਲ ਤੇ
ਫੇਰ ਹਰ ਥਾਂ ਤੇ ਮੇਰਾ ਹੀ ਚੇਹਰਾ ਦਿੱਸਣਾ ਔਰ ਯਾਦ ਕਰੇਗਾ ਮੇਰਿਆਂ ਹੀ ਬਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਬਾਲਾਂ ਚੋਰ ਹੂੰਦਾ ਐਂ ਇਸ਼ਕ
ਖੋ ਲੈ ਜਾਂਦਾ ਫਿਰ ਹਰ ਇੱਕ ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਨਾ ਪੈ ਤੂੰ ਹੁਣ ਮੈਂ ਤਾਂ ਪੈ ਗਿਆ ਇਸ਼ਕ ਚ
ਤੇਰਾਂ ਇਹਨੇ ਸਭ ਲੁਟ ਲੈ ਜਾਣਾ ਚੇਨ ਵੀ ਤੇਰਾ ਰੇਹ ਨਾ ਨੀ
ਬਾਲਾਂ ਮਿੱਠਾ ਲਗਦਾ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਚ
ਫਿਰ ਹਾਲ ਤੇਰਾ ਇਦਾਂ ਦਾ ਕਰ ਦੇਣਾ ਇਹਨੇ ਫਿਰ ਸਜਣਾਂ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਤੂੰ ਰਹਿਣਾ ਨੀ
ਫਿਰ ਰੋਏਗਾ ਹੰਜੂਆ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਕੁੱਝ ਵੀ ਨੀ ਰਹਿਣਾ ਤੇਰੇ ਕੋਲ਼
ਰਾਤਾਂ ਕਾਲੀਆਂ ਕਟੇਗਾ ਕਲਾ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ ਤੂੰ ਫਿਰ ਸੋਣਾ ਨੀ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷