कहाँ किस दर्ज़ा मुक़ाबिल हैं कमल उनके।
उनके बड़े हर्फ़ों के बराबर तो हम हर्फ़ तक नहीं रखते।
यहाँ तक है एहतराम ए मुहब्बत हमारा।
वो 5.4 फीट की हैं तो हम भी झुक के चलते हैं।❤️🙈
कहाँ किस दर्ज़ा मुक़ाबिल हैं कमल उनके।
उनके बड़े हर्फ़ों के बराबर तो हम हर्फ़ तक नहीं रखते।
यहाँ तक है एहतराम ए मुहब्बत हमारा।
वो 5.4 फीट की हैं तो हम भी झुक के चलते हैं।❤️🙈

हम दीवानों की बस्ती में, दीवाना एक और भी आया है..
घबराया हुआ है थोड़ा सा, नाम भी अपना बताया है..
चेहरे की शिकन उसकी साफ जाहिर करती है..
के टूट जाते हैं दिल, जिस नगरी में, उसने भी वहाँ हुनर अजमाया है..💯