MOHABBAT KI LAKEERON SE DOOR KHWAABON MAIN JI RAHI HO MAIN
WO LAMHA WASL KA KABHI MERI HAYAAT MAIN TO AAYE GA NAHI
محبّت کی لکیروں سے دور خوابوں میں جی رہی ہوں میں
وہ لمحہ وصل کا کبھی میری حیات میں تو آئے گا نہیں
MOHABBAT KI LAKEERON SE DOOR KHWAABON MAIN JI RAHI HO MAIN
WO LAMHA WASL KA KABHI MERI HAYAAT MAIN TO AAYE GA NAHI
محبّت کی لکیروں سے دور خوابوں میں جی رہی ہوں میں
وہ لمحہ وصل کا کبھی میری حیات میں تو آئے گا نہیں
ਠੱਗ ਘੁਮਦੇ ਨੇ ਚੇਹਰੇ ਬਦਲ ਕੇ
ਦਿਲ ਤੇ ਠੱਗੀ ਮਾਰਨ ਲਈ
ਐਹ ਸੋਹਣੇ ਚੇਹਰੇ ਵਾਲੇਆਂ ਤੋਂ ਬਚ ਕੇ ਰੇਹਣਾ ਚਾਹੀਦਾ
ਐਨਾ ਦੀ ਅਖਾਂ ਹੀ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ
ਐਹ ਖੇਡ ਚਲਾਕੀਆਂ ਦਾ ਏਣਾ ਲਈ ਆਮ ਐਂ
ਕਈ ਲੁਟਗੇ ਨੇ ਐਹਣਾ ਤੋਂ
ਤੇ ਕਈ ਲੁੱਟਦੇ ਨੇ ਅੱਜ ਵੀ ਸ਼ਰੇਆਮ ਐਂ
ਕੁਝ ਪਤਾ ਨੀ ਹੁੰਦਾ ਐਹਣਾ ਦਾ
ਗਲਾਂ ਮਿੱਠੀ ਐਹਣਾ ਦੀ ਬਹੁਤ ਹੈਂ ਹੁੰਦੀ
ਏਣਾ ਤੋਂ ਲੁੱਟਣ ਤੋਂ ਬਾਦ
ਨਾ ਜਾਨ ਜਿਊਂਦੀ ਤੇ ਨਾ ਮਰਦੀ ਹੈ ਹੁੰਦੀ
ਬਡ਼ਾ ਦਿਲਕਸ਼ ਹੁੰਦਾ ਐਂ ਜਾਲ ਇਣਾ ਦਾ
ਲੁਟਣਾ ਪੈਂਦਾ ਦਾ ਐਹਣਾ ਨੂੰ ਚਾਹੁਣ ਲਈ
ਰਖਦੇ ਨੇ ਐਹ ਚੇਹਰੇ ਬਦਲ ਕੇ
ਦਿਲ ਤੇ ਠੱਗੀ ਮਾਰਨ ਲਈ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?
एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – “महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।”
तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।