जो लोग हमे पागल कहते थे
उनका कहना अब ठीक लगता हैं
तेरे इश्क में रहेगें ता उम्र अब
चाहे कितना भी अजीब लगता हैं
तेरे मर्जी हैं आ या नही
हम अब ऐसे ही जियेगे
हमे यही सलीका अब ठीक लगता हैं
गिरा तो फ़िर कभी,उठा ना मिला
बंदों का हुज़ूम था,खुदा ना मिला
ज़िस्म ना मिले,तो क्या हुआ यार
वो दिल से कभी, जुदा ना मिला
परिंदों के जैसा था, इश्क़ उसका
कोई वादा, कोई वास्ता ना मिला
ऐसे हुआ दिल पर,कब्ज़ा उसका
धड़कनों को भी, रास्ता ना मिला
उसके शाहपरस्त भी हैं,बादशाह
कोई भी पत्थर,तरास्ता ना मिला