मुस्कुराने की वजह न ढूंढो,
वरना ज़िंदगी युही कट जाएगी,
कभी बेवजह मुस्कुराकर तो देखों,
आपकी साथ ये जिंदगी भी मुस्कुरायेंगी…
मुस्कुराने की वजह न ढूंढो,
वरना ज़िंदगी युही कट जाएगी,
कभी बेवजह मुस्कुराकर तो देखों,
आपकी साथ ये जिंदगी भी मुस्कुरायेंगी…
माना तुम्हे हर बार देखता हूं,
हर बार पहली बार देखता हूं,
देखता हूं तुम्हे जब जुल्फें संवरती हो तुम,
उन जुल्फों को आइना बनके हर बार देखता हूं,
आंखो में रातें और सुर्खी में ग़ुलाब जैसे,
मेरे हाथ खाली जाम तुम्हारे होंठो में शराब जैसे,
जैसे हर बार तुम्हारा वो ख़्वाब देखता हूं,
तुम्हारे हाथों में मेरा दिया वो ग़ुलाब देखता हूं,
वक्त हो तो आना कभी इक हसरत बाकी है,
तुम्हे हर बार की तरह पहली बार देखना बाकी है...
तुझे देखने की ख्वाहिश ले के घर से तो निकल पड़ता हूँ…
यही सोच के कि तू आज मिलेगी जरूर…
पर इस दिल को क्या पता है… कि तू उसे भूल चुकी हैं…
यूँ तो तेरा हर बार का मुस्कुराना इन
हवाओं और फिज़ाओ में बसा हैं…
ये हवा जब भी तुझे छूकर गुजरती है…
ना चाहते हुए भी तू याद आ ही जाती है।