ਨਾ ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਮਹਿੰਗੇ ਫੋਨ ਹੈ
ਤੇ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੇ ਕਪੜੇ
ਅਸੀਂ ਮਿੜਲ ਕਲਾਸ ਲੋਕ ਹਾ ਉਸਤਾਦ
ਅਸੀਂ ਅਪਣੇ ਵਿੱਚ ਹੀ ਉਲਝ ਰਹੇ ਜਾਂਦੇ ਹਾ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਡੇ ਲਫੜੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
ਨਾ ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਮਹਿੰਗੇ ਫੋਨ ਹੈ
ਤੇ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੇ ਕਪੜੇ
ਅਸੀਂ ਮਿੜਲ ਕਲਾਸ ਲੋਕ ਹਾ ਉਸਤਾਦ
ਅਸੀਂ ਅਪਣੇ ਵਿੱਚ ਹੀ ਉਲਝ ਰਹੇ ਜਾਂਦੇ ਹਾ ਨਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਡੇ ਲਫੜੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Uska chand sa Noorani chehra dekhne se, Meri subah main bhi ho jaati raat.
Insaano main wo shaamil na hoti, Fariston jesi thi usme kuch baaat.
Sukhi sukhi dukh bhaari zameen main bhi, khushiyon ki toofani baarish hoti jab hoti wo mere saath. ❤️
उसका चाँद सा नूरानी चेहरा देखने से, मेरी सुबह मेंभी हो जाती रात
इंसानों में वो शामिल न होती, फरिश्तों जैसी थी उसमें कुछ बात
सूखी सूखी दुख भरी ज़मीन में भी
खुशियों की तूफानी बारिश होती जब होती वो मेरे साथ❤️
मैंने मेरे मन में
एक भरोसा पाला
उसे कभी क़ैद नहीं किया
वह जब-जब उड़ा फिर लौट आया
चिड़िया जैसे नन्हे पंख उगे
धरती के गुरुत्व के विरुद्ध पहली उड़ान
पहला लक्षण था आज़ादी की चाहना का
भरोसे के भीतर एक और भरोसा जन्मा
और ये सिलसिला चलता रहा
अब इनकी संख्या इतनी है
कि निराश होने के लिए
मुझे अपने हर भरोसे के पंख मरोड़कर
उन्हें अपाहिज बनाना होगा!
करना होगा क़ैद
जो मैं कर नहीं पाऊँगी
हैरानी! मैं ऐसा सोच भी पाई
अपनी इस सोच पर बीती रात घंटों सोचा
ख़ुद पर लानतें फेंकीं
कोसा ख़ुद को
मन ग्लानि से भर उठा
आँखों के कोने भीगते गए
और फिर इकठ्ठा किया अपना सारा प्यार
उनके पंखों को सहलाया
हर एक भरोसे को पुचकारा
उनके सतरंगे पंखों को
आज़ादी के एहसास से भरते देखा
सुबह तक वे एक लंबी उड़ान पर निकल चुके थे
उनकी अनुपस्थिति में
मैं निराश!
पर जान पा रही थी कि शाम तक वे लौट आएँगे
यह वह भरोसा है
जिसके पंख अभी उगने बाक़ी हैं
जो अभी ही है जन्मा!