Dhang de naag yaada de
me bhul ni sakda ohnu
edaa da haal hai saada
me chhadd ni sakda ohnu
ਡੰਗ ਦੇ ਨਾਗ ਯਾਦਾਂ ਦੇ
ਮੈਂ ਭੁੱਲ ਨੀਂ ਸਕਦਾ ਓਹਨੂੰ
ਇਦਾਂ ਦਾ ਹਾਲ ਹੈ ਸਾਡਾ
ਮੈਂ ਛੱਡ ਨੀ ਸਕਦਾ ਓਹਨੂੰ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Dhang de naag yaada de
me bhul ni sakda ohnu
edaa da haal hai saada
me chhadd ni sakda ohnu
ਡੰਗ ਦੇ ਨਾਗ ਯਾਦਾਂ ਦੇ
ਮੈਂ ਭੁੱਲ ਨੀਂ ਸਕਦਾ ਓਹਨੂੰ
ਇਦਾਂ ਦਾ ਹਾਲ ਹੈ ਸਾਡਾ
ਮੈਂ ਛੱਡ ਨੀ ਸਕਦਾ ਓਹਨੂੰ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Jhuth fareb sabh lad lagge mere
Palla sach ne ta kade fadeya naa..!!
Jhalle ban duniya to Kari umeed pyar di
Pyar khuda ton siwa kise kareya naa..!!
ਝੂਠ ਫ਼ਰੇਬ ਸਭ ਲੜ ਲੱਗੇ ਮੇਰੇ
ਪੱਲਾ ਸੱਚ ਨੇ ਤਾਂ ਕਦੇ ਫੜਿਆ ਨਾ..!!
ਝੱਲੇ ਬਣ ਦੁਨੀਆਂ ਤੋਂ ਕਰੀ ਉਮੀਦ ਪਿਆਰ ਦੀ
ਪਿਆਰ ਖੁਦਾ ਤੋਂ ਸਿਵਾ ਕਿਸੇ ਕਰਿਆ ਨਾ..!!
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।