Naaz hunda e jihna te
Kade Kade oh vi Dil dukha jande ne..!!
ਨਾਜ਼ ਹੁੰਦਾ ਏ ਜਿਹਨਾਂ ਤੇ
ਕਦੇ ਕਦੇ ਉਹ ਵੀ ਦਿਲ ਦੁਖਾ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..!!
Naaz hunda e jihna te
Kade Kade oh vi Dil dukha jande ne..!!
ਨਾਜ਼ ਹੁੰਦਾ ਏ ਜਿਹਨਾਂ ਤੇ
ਕਦੇ ਕਦੇ ਉਹ ਵੀ ਦਿਲ ਦੁਖਾ ਜਾਂਦੇ ਨੇ..!!
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
Roz din ehi hisaab launde nikal janda e
Shayad sabh badal gya e
Nahi duniya hi badal gyi e
Ja shayad asi hi badal gye haan..!!
ਰੋਜ਼ ਦਿਨ ਇਹੀ ਹਿਸਾਬ ਲਾਉਂਦੇ ਨਿਕਲ ਜਾਂਦਾ ਏ
ਸ਼ਾਇਦ ਸਭ ਬਦਲ ਗਿਆ ਏ
ਨਹੀਂ ਦੁਨੀਆਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਈ ਏ
ਜਾਂ ਸ਼ਾਇਦ ਅਸੀਂ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਹਾਂ..!!