Nafrat hai muje us mohobbat se
Jo mohobbat Mene kbi tumse ki thi..!!
नफ़रत है मुझे उस मोहोब्बत से
जो मोहोइब्ब्त मैनें कभी तुमसे की थी..!!
Nafrat hai muje us mohobbat se
Jo mohobbat Mene kbi tumse ki thi..!!
नफ़रत है मुझे उस मोहोब्बत से
जो मोहोइब्ब्त मैनें कभी तुमसे की थी..!!
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..