Enjoy Every Movement of life!
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Kya karein is raat ka jismein andhere se jada uski yadein basi hui hain💔
क्या करे इस रात का जिसमें अंधेरे से ज्यादा उसकी यादें बसी हुई हैं 💔
