
hun ki fayida luk luk ron da tu meri wafa da mol chuka gayi hai

खत्म कर चुका खुद को अंदर से
बस बाहर से जालना बाकी है
भीड़ लगी है मजार पर गैरो की ,
बस अपनों का आना बाकी है
जीते जी सबको हसाया बहोत है ,
बस जाते – जाते सबको रुलाया बाकी है ।
याद करके उसे ,रोये बहोत है
जाते जाते उसे रुलाना बाकी है
खवाब देखे थे साथ के उसके कुछ
जाते हुये उन्हे दफनाना बाकी है ।
यू ना रुखसत करो विरानियत से
अभी मेरी अर्थी को सजाना बाकी है ,
यू तो गुजरा हु बहोत बार अंधेरों से
बीएस आखिरी दफा दिल्ल को जलाना बाकी है ।
Vajah dhundni hai to muskurane ki dhundo udaasi to bas samay gvane ka ek tareeka hai
वजह ढूंढनी है तो मुस्कुराने की ढूंढो उदासी तो बस समय गवाने का एक तरीका है