lokaa di nazaraa ton asi ki laina
asi apni nazraa ch sahi aa
changa taa ithe koi v nai
te saanu maadha kehan wale kai aa
ਲੋਕਾ ਦੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਤੋਂ ਅਸੀਂ ਕੀ ਲੈਣਾ
ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਚ ਸਹੀ ਆ
ਚੰਗਾ ਤਾਂ ਇਥੇ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ
ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਮਾੜਾ ਕਹਿਣ ਵਾਲੇ ਕਈ ਆ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
“फिर आज युंहिं मौसम बदला, चहकती
देखो हर एक डाल है..
मद्धम सी बरसात हुई, छिल गई कई पेड़ों की छाल है..
हर पत्ते हर डाली ने पूछा, क्या दर्द हुआ? क्या तेरा हाल है..
कहा हुआ हूं, नया मैं फिर से, क्या जानो तुम कुदरत कमाल है..
मुझको ताकत दी है इतनी, शक्ति मेरी बेमिसाल है..
हर जीव में सांसें भरता हूं, सब करते मेरा इस्तेमाल है..
काटेंगे मुझे तो भुगतेंगे, कुदरत का कहर सबसे विशाल है..
बे-मौसम जो मौसम बदल रहे हैं, जवाब पता है, फिर भी सवाल है..”