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Nibhana sikho…♥️💯 || rishte || hindi shayari || beautiful lines

Koi Toote To Use Sajana Seekho; Koi Roothe To Use Manana Seekho; Rishte To Milte Hain Muqaddar Se; Bas Use Khoobsurti Se Nibhana Seekho💯♥️

Title: Nibhana sikho…♥️💯 || rishte || hindi shayari || beautiful lines

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


धरती सारी

दरवाज़ा किसी के जीवन में

ख़ुद को समझ लें

उस ग़ुरूर से बचाना ईश्वर

कि बंद करने को

कुछ रहे पास

दीवार ही सही

कमर टिकाई हो जिस पर

कभी किसी कमज़ोर पल

उस पर थूक सकने की

जहालत से भी बचाना

पर वह साहस ज़रूर देना

जो मुँह से बाहर निकलते दिल को पकड़ सके

सँभाल सके और कह सके

कि जो पाया उसे लौटाने से ज़्यादा ज़रूरी है

उस भूमिका को सँभालना जो हम निभाते हैं

अपने या किसी और के जीवन में

माफ़ कर सकें उनसे ज़्यादा खुद को

याद रख सकें बस इतना

कि विश्व के सबसे अलोकप्रिय लोगों ने बख़्शी जान हमें

उन्हें सबने नज़रंदाज़ किया

उनके पैरों में सारे आँसू वार दें

उनकी हथेली में बिखेर सकें सारी हँसी

जब कह देना ही सब कुछ हो

चुप रह सकें उस वक़्त

कड़वी बात को यूँ ज़ब्त कर लें

नाख़ूनों में भर लें

खुरचकर धरती सारी।

Title: धरती सारी


माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry

पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.

आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.

खामोशी मेरी जुबान को  सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने  भर दिया.

अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.

वह रात  छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.

ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.

पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.

लगता था तू आएगी बहुत  डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.

चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.

जाना चाहती हूं  उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.

जब तेरे बिना लोरियों  कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.

अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.

खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.

Title: माँ को बेटी की पुकार कविता ||Hindi poetry