
Gallan rooh naal karn de ishare dekhe mein..!!
Akhan chamkdiya noir chehre utte
Ajj kayi saal baad oh nazare dekhe mein..!!

गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
ਕੱਚੇ ਕੋਠੇ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਵੇਹੜੇ ਉਹ ਵੀ ਬੜੇ ਨਜ਼ਾਰੇ ਸੀ
ਦਿਲਾਂ ਵਿਚ ਨਾ ਖਾਰ ਕੋਈ ਨਾਲੋ ਨਾਲ ਚੁਬਾਰੇ ਸੀ
ਗੱਡੀਆਂ ਦੇ ਚਾਅ ਸੀ ਕਿਨੂੰ ਪੀਂਗਾ ਦੇ ਹੁਲਾਰੇ ਸੀ
ਕੱਚੇ ਕੋਠੇ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਵੇਹੜੇ ਉਹ ਵੀ ਬੜੇ ਨਜ਼ਾਰੇ ਸੀ
ਉਹ ਵੀ ਬੜੇ ਨਜ਼ਾਰੇ ਸੀ……………
Kache kothe khulle vehde oh vi bade najare si
Dila vich na khaar koi nalo nal chubare si
Gaddiya de chaa si kinu peenga de hulare si
Kache kothe khulle vehde oh vi bade najare si
Oh vi bade najare si…………..