Oh hassda e ta rooh v Khili rehndi e
Oh Udaas howe ta meri jaan nikaldi e..!!
ਉਹ ਹੱਸਦਾ ਏ ਤਾਂ ਰੂਹ ਖਿਲੀ ਰਹਿੰਦੀ ਏ
ਉਹ ਉਦਾਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਮੇਰੀ ਜਾਨ ਨਿਕਲਦੀ ਏ..!!
Oh hassda e ta rooh v Khili rehndi e
Oh Udaas howe ta meri jaan nikaldi e..!!
ਉਹ ਹੱਸਦਾ ਏ ਤਾਂ ਰੂਹ ਖਿਲੀ ਰਹਿੰਦੀ ਏ
ਉਹ ਉਦਾਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਮੇਰੀ ਜਾਨ ਨਿਕਲਦੀ ਏ..!!
हटा ली आइने से धूल ए ग़ालिब,
अब दामन मैला सा लगता है,
रूह तो नापाक थी ही,
अब आंगन भी मैला सा लगता है,
देखना ज़रूर के परिंदे भी छोड़ जायेंगे
बसेरा अपना उस दर से,
जिस दर पर मोहब्बत का मेला भी,
मैला सा लगता है...
वो मेरे चर्चे गुफ्तगू के बहाने से सबसे करते हैं,
ये जान के भी हम इस बात से हर पल मरते हैं,
जिन अपनो को के लिए सीने में मोहब्बत थी,
उनके अब हम पास गुजरने से भी बहुत डरते हैं,
मुझे कैद करके कितना जीने दे सकोगे तुम भला,
देखो कितनी शिद्दत से हम मौत की दुआ पढ़ते हैं,
मेरी जान को गुनाहों से तौल कर क्या पा लोगे,
मेरे हर्फ़ के वजन से गुनाह अक्सर बदलते हैं ,
उर्दू का कोई शायर होता मैं लफ्ज़ संभाल लेता,
गोया अगर होते तो लफ्ज़ न गिरते, न इतना संभलते।