
Oh nivi pa k lang jande ne
te me ohna nu vekhda rehnda
oh horaan de khawaab vekhde ne
te me ohna de khawaab sajaunda rehnda

Oh nivi pa k lang jande ne
te me ohna nu vekhda rehnda
oh horaan de khawaab vekhde ne
te me ohna de khawaab sajaunda rehnda
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
Karne gya bazar apni dosti ki khoj
dosti se naraz mile hume kuch dost
humne pucha dost banoge kya?
unhone haste hue kaha bewaqt bin wajah rukoge kya
aakhe ye kehkar nam ho gyi
bin bole humari dosti aarambh ho gyi🌼
करने गया बाज़ार अपनी दोस्त की खोज
दोस्ती से नाराज़ मिले हमें कुछ दोस्त
हमने पूछा दोस्त बनोगे क्या?
उन्होंने हँसते हुए कहा बेवक़्त बिन वजह रुकोगे क्या
आंखें यह कहकर नम हो गई
बिन बोले हमारी दोस्ती आरंभ हो गई🌼