Ohne door hon toh pehlaan ikk vaar bhi nahi sochya,
Bss aahi soch-soch zindagi guzarti main taan…
Ohne door hon toh pehlaan ikk vaar bhi nahi sochya,
Bss aahi soch-soch zindagi guzarti main taan…
Do Shabd Tasalli Ke Nahi Milte Iss Shahar Mein,
Log Dil Mein Dimaag Liye Firte Hain.
दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए फिरते हैं।
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी