
Padh sako toh padh lo inh ankhon mein
apna naam
lafzo mein byaan karna bahut mushkil hai tumhe

Le jaawa tainu nadiyo paar
jithe koi gair na wasda howe
taareyaa thalle baith galla kariye
dekh chann v othe hasda howe
cheti hi me gal, dil di kehni
kite jhatt akh na, meri khulje
supna dekhiyaa, ik inmol jeha
neend khulde saar na
oh supne bhulje
ਲੈ ਜਾਵਾਂ ਤੇਨੂੰ ਨਦੀਓਂ ਪਾਰ
ਜਿੱਥੇ ਕੋਈ ਗ਼ੈਰ ਨਾ ਵਸਦਾ ਹੋਵੇ
ਤਾਰਿਆਂ ਥੱਲੇ ਬੈਠ ਗੱਲਾਂ ਕਰੀਏ
ਦੇਖ ਚੰਨ ਵੀ ਉੱਥੇ ਹੱਸਦਾ ਹੋਵੇ
ਛੇਤੀ ਹੀ ਮੈਂ ਗੱਲ, ਦਿੱਲ ਦੀ ਕਿਹਣੀ
ਕਿਤੇ ਝੱਟ ਅੱਖ ਨਾ, ਮੇਰੀ ਖੁੱਲਜੇ
ਸੁਪਨਾ ਦੇਖਿਆ, ਇੱਕ ਅਨਮੋਲ ਜੇਹਾ
ਨੀਂਦ ਖੁਲਦੇ ਸਾਰ ਨਾ
ਉਹ ਸੁਪਨਾ ਭੁੱਲਜੇ 😐
तन पर खराब पुराने कपड़े होते हैं,
पैर मिट्टी में पूरी तरह सने होते हैं,
कड़ी सुलगती धूप में काम करते हैं जो,
ये कोई और नहीं सिर्फ किसान है वो,
धरती की छाती हल से चीर देते हैं,
हमारे लिए अन्न की फसल उगा देते हैं,
किसान अपनी फसल से बहुत प्यार करते हैं,
गरमी, सरदी, बरसात में जूझते रहते हैं,
मान लेते हैं की किसान बहुत गरीब होते हैं,
हमारी थाली में सजा हुआ खाना यही देते हैं,
इनके बिना हमें अनाज कभी मिल नहीं पाता,
दौलत कमा लेते पर कभी पेट न भर पाता,
भूमि को उपजाऊ बनाने वाले किसान है,
हमारे भारत का मान, सम्मान और शान हैं,
ये सच्ची बात सब अच्छे से जानते हैं,
किसान को हम अपना अन्नदाता मानते हैं,
हम ये बात क्यों नहीं कभी सोचते हैं,
गरीब किसान अपना सब हमें देते हैं,
हम तो पेट भर रोज खाना खा लेते हैं,
किसान तो ज्यादतर खाली पेट सोते हैं,
तरुण चौधरी