
Chug chug pathar tere shehar diyaan galiyaan chon
aapne dil di senjh te dharanga
peedh judaai vali zaranga te c v nahi karanga

Chug chug pathar tere shehar diyaan galiyaan chon
aapne dil di senjh te dharanga
peedh judaai vali zaranga te c v nahi karanga
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं …
तेरा अंदर का दिल के दर्द का भी कोई जवाब नही ..
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
तेरा भीगी हुआ आंखो की नमी का भी कोई जवाब नंही
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
तेरा तमन्हा पूरी ना होना का भी कोई हिसाब नहीं
खुबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
हस्त हुए चेहरा के पीछे की खामोशी का भी कोई जवाब नंही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नंही…
चमकता हुआ चेहरा के पीछे के अंधेरी दुनिया का कोई जवाब नंही….
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
तेरी हसीन झुल्फो के पीछे छुपा हुआ उलझन का भी कोई जवाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं…
पैरो का नीचा छुपा हुआ काटो का भी कोई जवाब नंही….
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं….
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नहीं….
अपनो के लिए खुद को भूल जाने का भी कोई हिसाब नहीं…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही..
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तो कोई जवाब नही….
हाथो के मेहंदी के पीछे छुपी हुई अरमानों की लकीरों का भी कोई हिसाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
खूबसूरत तो बहुत हो तुम तेरा कोई जवाब नही…
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…