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Pathr dil nikkleh |punjabi poetry|

Roooh deh naal layiya c jo yaariyan

Aaj kyu  behwafa nikkle

Enna dard deh keh kyuu ਪ੍ਰਾਂ nikkleh

soch da hai dil klleya beh keh enneh kyu

Sajjan beyimaan nikkleh

Dil te pathr rakh seh reha onna di judaayi

Per ooh enneh kyuu pathr dil nikkleh

Pulleh pulleh lggn lgg Pye,

ooh log!

Jo jassal di majburia da fayeda chknn lgg pye

Title: Pathr dil nikkleh |punjabi poetry|

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Hindi 2 LinE shayari collection || thoughts || true lines

घर के अंदर क्या चल रहा है, ईश्वर को भी नहीं मालूम।
बाहर आकर जो शांति का वाणी सुनाया, हंसता-खेलता हुआ बात बताया, उसका अंदर काला जुर्म।
परिवार के अंदर बहुत छुपी हुई बातें रहती।
वह कांटे की तरह घायल करती है, लेकिन अपना भलाई के लिए सामने नहीं लाया जाती।
लड़कियाँ बहुत अच्छी या बहुत बुरी होती हैं, लड़के बीच में रहता हैं।
अगर अच्छी लड़की मिली तो, वह भगवान बन जाता, और अगर बुरी लड़की मिली तो, वह असुर बनता है।
सब लड़कियाँ पैसा का दासी नहीं हैं,
लेकिन सब लड़के रूप की दास हैं।
सब लड़के बुरा नहीं होता, सब लड़कियाँ अच्छी नहीं होती।
अच्छे बुरे मिलकर दुनिया- आग आविष्कार से शुरू सभ्यता और आग में ही आत्माहुति।
ऐसे लिखना होता है, वैसे नहीं लिखना।
आपका कलम लिखता है और मेरा भावनाएँ, हमेशा दिल की बातें सुनना।
जिनके पास भावनाएं नहीं है, वह एक गतिशील शब्दकोश होता है।
भाषा की कठिनाई से हिलती है धरती और वह सबको बहुत कुछ बताते रहते है।
जिनके पास भावनाएं है, वह खुद से बातें करते है।
वह दूसरे का ग़लतियाँ न देखकर, खुद को आविष्कार करते है।
यह कैसा कविता है, ऐसे लिखना।
एक एक शब्द मेरा स्वाधीन चेतना की फसल है, दिल की बात आपको कैसे पता।
ज़िंदगी में हार या जीत बड़ी बात नहीं।
समय के साथ साथ ज़िंदगी को उपभोग करो तो सही।
संसार एक सबसे बड़ा चिड़ियाघर है।
सब जानवरों मिलते हैं एक हृदय में, वह इंसान का, दिमाग तेज़ इसलिए।
इंसानों की घर पर बहुत सारे जानवरों रहते हैं, वे इंसानों का भिन्न रूप।
कब कौन जाग जाते, कब कौन सो जाते, कब कौन किसके साथ टकराने- छाया ने खा गए सूरज की धूप।
लोग बहुत कुछ कहेंगे, इसका मतलब आप ने पहुँचे ऊपर।
जो हमेशा अच्छे बातें सुनते है, सबसे नीचे उसके घर।
जब आप कुछ सुन रहे है, आप सही रास्ते पर है।
गलत रास्ते में कुछ सुनाई नहीं देता, क्योंकि जाना बहुत आसान है।
जब जाना ही था, तब आया क्यों, पास छोड़कर दूर ही रहते।
अलविदा कहना नहीं पड़ता और हम सब पल में शामिल होते।
इंसान कितना शैतान होता है, अपना सुख के लिए दूसरे का सुख छीन लेते।
गायक कितना महान होता है, गाना के लिए अपना जीवन दे देते।
 

Title: Hindi 2 LinE shayari collection || thoughts || true lines


ईश्वर अच्छा ही करता है || akbar story

बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना-नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि “ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है, कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।”

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, ‘‘देखो, ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया। कल शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ?’’

कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल, ‘‘मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है।’’

सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, ‘‘बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए।’’

बीरबल मुस्कराता हुआ बोला, ’’ठीक है जहांपनाह, समय ही बताएगा अब।’’

तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए, बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।

‘‘नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती।’’ मंदिर का पुजारी बोला, ‘‘यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे, अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा।’’

और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।

अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।

तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।

‘‘तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ?’’ अकबर ने सवाल किया।

जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, ‘‘अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है, मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी।’’

अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा, जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

Title: ईश्वर अच्छा ही करता है || akbar story