Peenda nahi haa nashaa fer v baneyaa rehnda hai
aksar ohna di yaad sharabi kar dindi hai mainu
ਪੀਂਦਾ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਨਸ਼ਾ ਫੇਰ ਵੀ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ,
ਅਕਸਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਯਾਦ ਸ਼ਰਾਬੀ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਮੈਂਨੂੰ
Peenda nahi haa nashaa fer v baneyaa rehnda hai
aksar ohna di yaad sharabi kar dindi hai mainu
ਪੀਂਦਾ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਨਸ਼ਾ ਫੇਰ ਵੀ ਬਣਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ,
ਅਕਸਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਯਾਦ ਸ਼ਰਾਬੀ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਮੈਂਨੂੰ
Manzil bhi uski thi, rasta bhi uska tha,
Ek mein hi akela tha, baki sara kafila bhi uska tha,
Ek sath chalne ki soch bhi uski thi,
Aur baad mein rasta badlne ka faisla bhi usi ka tha..
मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था,
एक मैं ही अकेला था, बाकि सारा काफिला भी उसका था,
एक साथ चलने की सोच भी उसकी थी,
और बाद में रास्ता बदलने का फैसला भी उसी का था।
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है